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छाँछ(लस्सी) पीने के फायदे जानकर आप हो जाएंगे हैरान:सेहत संसार

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छाछ अपने गरम गुणों, कसैली, मधुर और पचने में हलकी होने के कारण कफ़नाशक और वातनाशक होती है, पचने के बाद इसका विपाक मधुर होने से पित्तक्रोप नही करती ।

जो भोरहि माठा पियत है,
जीरा नमक मिलाय !
बल बुद्धि तीसे बढत है,
सबै रोग जरि जाय !!

मट्ठा को पीने से सिर के बाल असमय में सफेद नहीं होते हैं। भोजन के अन्त में छाछ, रात के मध्य दूध और रात के अन्त में पानी पीने से स्वास्थ्य अच्छा रहता है।छाछ या मट्ठा शरीर में उपस्थित विजातीय तत्वों को बाहर निकालकर नया जीवन प्रदान करता है।

यह शरीर में प्रतिरोधात्मक (रोगों से लड़ने की शक्ति) शक्ति पैदा करता है। मट्ठा में घी नहीं होना चाहिए। गाय के दूध से बनी मट्ठा सर्वोत्तम होतीहै। मट्ठा का सेवन करने से जो रोग नष्ट होते हैं। वे जीवन में फिर दुबारा कभी नहीं होते हैं।

छाछ खट्टी नहीं होनी चाहिए। पेट के रोगों में छाछ को दिन में कई बार पीना चाहिए। गर्मी में मट्ठा पीने से शरीर तरोताजा रहता है। रोजाना नाश्ते और भोजन के बाद मट्ठा पीने से शारीरिक शक्ति बढ़ती है। मट्ठा को पीने से सिर के बाल असमय में सफेद नहीं होते हैं।

भोजन के अन्त में मट्ठा, रात के मध्य दूध और रात के अन्त में पानी पीने से स्वास्थ्य अच्छा रहता है।दही को मथकर छाछ को बनाया जाता है। छाछ गरीबों की सस्ती औषधि है। मट्ठा गरीबों के अनेक शारीरिक दोषों को दूरकर उनकी तन्दुरुस्ती बढ़ाने में तथा आहार के रूप में महत्वपूर्ण है।

कई लोगों को छाछ नहीं पचती है। उनके लिए मट्ठा बहुत ही गुणकारी होती है। ताजा मट्ठा बहुत ही लाभकारी होती है। छाछ की कढ़ी स्वादिष्ट होती है और वह पाचक भी होती है। उत्तर भारत में तथा पंजाब में छाछ में चीनी मिलाकर उसकी लस्सी बनाकर उपयोग करते हैं।

लस्सी में बर्फ का ठण्डा पानी डाला जाए तो यह बहुत ही लाभकारी हो जाती है। लस्सी जलन, प्यास और गर्मी को दूर करती है। लस्सी गर्मी के मौसम में शर्बतका काम करती है। छाछ में खटाई होने से यह भूख को बढ़ाती है।

भोजन में रुचि पैदा करती है और भोजन का पाचन करती है जिन्हें भूख न लगती हो या भोजन न पचता हो, खट्टी-खट्टी डकारें आती हो और पेट फूलने से छाती में घबराहट होती हो तो उनके लिए छाछ का सेवन अमृत के समान लाभकारी होता है। इसके लिए सभी आहारों का सेवन बंद करके 6 किलो दूध की छाछ बनाकर सेवन करने से शारीरिक शक्ति बनी रहती है।

केवल छाछ बनाकर सेवन करने से मलशुद्धि होती है तथा शरीर फूल सा हल्का हो जाता है। शरीर में स्फूर्ति आती है उत्साह उत्पन्न होता है तथा जठराग्नि और आंतों को ताजगी तथा आराम मिलता है।

मट्ठा जठराग्नि को प्रदीप्त कर पाचन तन्त्र को सुचारू बनाती है। छाछ गैस को दूर करती है। अत: मल विकारों और पेट की गैस में छाछ का सेवन लाभकारी होता है।

खाना न पचने की शिकायत– जिन लोगों को खाना ठीक से न पचने की शिकायत होती है। उन्हें रोजाना मट्ठा में भुने जीरे का चूर्ण, काली मिर्च का चूर्ण और सेंधा नमक का चूर्ण समान मात्रा में मिलाकर धीरे-धीरे पीना चाहिए। इससे पाचक अग्रि तेज हो जाएगी।

दस्त– गर्मी के कारण अगर दस्त हो रही हो तो बरगद की जटा को पीसकर और छानकर छाछ में मिलाकर पीएं।एसीडिटी– मट्ठा में मिश्री, काली मिर्च और सेंधा नमक मिलाकर रोजाना पीने से एसीडिटी जड़ से साफ हो जाती है।कब्ज-अगर कब्ज की शिकायत बनी रहती हो तो अजवाइन मिलाकर मट्ठा पीएं।

पेट की सफाई के लिए गर्मियों में पुदीना मिलाकर लस्सी बनाकर पीएं।मट्ठा पित्तनाशक होती है यह रोगी को ठण्डक और पोषण देती है। शरीर में प्रवेश करने के बाद छाछ महास्रोत (जठर, ग्रहणी और आंतों) पर जोप्रभाव करती है।

उसमें पाचन तन्त्र में सुधार होता है तथा शरीर के आन्तरिक जहर नष्ट हो जाते हैं। छाछ दिल को शक्तिशाली बनाती है और खून को शुद्ध करती है। विशेषत: संग्रहणी (दस्त) रोग की क्रिया अधिक व्यवस्थित होती है।

उससे महास्रोत के विभिन्न रोग जैसे- संग्रहणी रोग (दस्त), अर्श (बवासीर), अजीर्ण (भूख न लगना), उदर रोग (पेट के रोग), अरुचि (भोजन करने का मन न करना), शूल अतिसार (दस्तों का दर्द), पाखाना या पेशाब बंद होना, तृषा (प्यास), वायु गुल्म (पेट में गैस का गोला), उल्टी, तथा यकृत-प्लीहा (जिगर तथा तिल्ली) के रोगों में छाछ पीना लाभकारी है। छाछ शीतलता प्रदान करने वाली, कषैला, मधुर रस उत्तेजित पित्त दोष को शान्तकर शरीर कोमूल प्राकृतिक स्थिति में ले आता है।

इसलिए पीलिया और पेचिश में भी छाछ का सेवन उपयोगी होता है। छाछ मोटापे को कम करती है। छाछ का सेवन करने वाले वृद्धावस्था (बुढ़ापे) से दूर रहते हैं। छाछ शरीर की चमक को बढ़ाती है। इससे चेहरे पर झुर्रियां नहीं पड़ती हैं। यदि पहले से होती हैं तो वे नष्ट हो जाती हैं।

छाछ आंतों के रोगों में उपयोगी होती है। यह आंतों को संकुचित कर उन्हें क्रियाशील बनाती हैऔर पुराने जमे हुए मल को बाहर निकालती है। छाछ के मलशोधन गुण के कारण मलोत्पत्ति तथा मलनिष्कासन सरल बनता है।

इसलिए पुराने मल के इकट्ठा होने से उत्पन्न टायफाइड (मियादी बुखार) की बीमारी में छाछ सेवन के लिए दी जाती है। मट्ठा का सबसे अधिक महत्वपूर्ण गुण है आमजदोष को दूर करना। हम लोग जिस भोजन का सेवन करते हैं।

उस भोजन में से पोषण के लिए उपयोगी रस अलग होकर बिना पचे पड़ा रहता है। उसे आमकहते हैं। आम अनेक प्रकार के रोग उत्पन्न करता है।

इन आमज दोषों को दूर करने में मट्ठा बहुत उपयोगी होता है। आमज की चिकनाहट को तोड़नेके लिए खटाई की आवश्यकता पड़ती है। यह खटाईपन छाछ में उपलब्ध होती है। मट्ठा इस चिकनाहट को धीरे-धीरे आंतों से अलगकर उसे पकाकर शरीर से बाहर निकाल देती है।

इसीलिए पेचिश में इन्द्रजौ के चूर्ण के साथ तथा बवासीर में हरड़ के साथ छाछ का सेवन करने से लाभ मिलता है।तक्रकल्प :गाय का दूध जमाकर हल्की खट्टी दही में 3 गुना पानी मिलाकर मथकर मक्खन निकालकर उसकी छाछ तैयार कर लें।

इसे सुबह-शाम भोजन के बाद 1गिलास से लेकर अनुकूलता के अनुसार अधिक से अधिक मात्रा में निरन्तर 5-7 दिनों तक सेवन करें। प्यास लगने पर पानी के स्थान पर छाछ पियें।

भोजन में चावल, खिचड़ी, उबली हुई तरकारी, मूंग की दाल तथा रोटी का सेवन करें और मट्ठा की मात्रा बढ़ाते जाएं तथा अनाज की मात्राघटाते जाएं।

लस्सी यानि के buttermilk कमाल का product है जो दूध से बनता है और कमाल की बात ये है कि दूध से बनने वाले सरे products में से छाछ को सबसे benefits वाला माना गया है ।

अऔर वो इसलिए भी कि ठीक है घी हमारे शरीर के लिए वसा की कमी को पूरा करता है लेकिन यह भी सही है कि अगर हमारा lifestyle सही नहीं है और हम proper वे में घी से प्राप्त हुई वसा और उर्जा को खर्च नहीं करते है तो अतरिक्त वसा हमारे लिए मोटापे का कारण बनती है इसलिए बहुत सी लड़कियां घी खाने से डरती भी है लेकिन buttermilk के साथ ऐसे नहीं नहीं है छाछ पहली बात तो एक तरल पेय है इसलिए इसे पचाने में पेट को इतनी मेहनत नहीं करनी पड़ती इसलिए
इसमें मौजुद् जितने भी पोषक तत्व है सारे के सारे सही तरीके से अवशोषित हो जाते है हमारे शरीर द्वारा जिसका हमे पूरा पूरा benefit होता है और साथ ही buttermilk में सबसे अधिक calcium पाया जाता है जो हमारी हड्डियों और शरीर के लिए बेहद आवश्यक है और हमारे शरीर के ढांचे को मजबूत बनाने के लिए सबसे अधिक यही आवशयक है।

*.गावों में लोग छाछ को अलग तरीके से बनाते है और वो लोग पुराने तरीके से दही से buttermilk को बनाते है जिसकी वजह से इसकी गुणवता मायने रखती है और हमे भोजन के साथ इसे लेने में सबसे अधिक लाभ होता है और खासकर गर्मी में बिना buttermilk के गाँव वाले भोजन की कल्पना भी नहीं करते और शायद यही वजह से वो शहर में रहने वाले लोगो से अधिक stamina लिए होते है|*.

महिलाओं में होने वाले मीनोपोज के समय उनके लिए खाने में buttermilk को शामिल करना एक बेहतर विकल्प हो सकता है calcium की कमी को पूरा करने का क्योंकि मीनोपोज के समय कई तरह की शारीरिक परेशानियाँ उन्हें झेलनी पड़ती है जिनमे जोड़ों मेंहोने वाला दर्द और कमर दर्द भी शामिल है।

*.buttermilk से पेट की कई तरह की समस्याएं खत्म हो सकती है जिसमे पेट की अपच ,भारीपन और गेस का बनना और पेट की जलन क्योंकि भोजन के साथ इसे लेने से भोजन भी पतला हो जाता है और सामान्य भूख से कम खाना हम खाते है जिसकी वजह से भूख से कम खाना खाने की concept भी फुलफिल होती है जिसकी वजह से यह हमे अधिक खाने से भी रोकती है और हम छाछ की वजह से भोजन के साथ पानी पीने से भी बच जाते है क्योंकि खाने के तुरंत बाद हमे प्यास की शिकायत नहीं होती है |*.
अगर आपकी पाचन शक्ति सही नहीं है कमजोर हो तो आप buttermilk में भुना हुआ जीरा , काली मिर्च का चूर्ण और सेंधा नमक मिलकर पी सकते है जिसकी वजह से आपके द्वारा लिया गया भोजन जल्दी पचता है |
*.buttermilk को सुबह के भोजन के साथ लेना अधिक गुणकारी माना गया है जबकि शाम के वक़्त इसे नहीं लेना चाहिए |*.
अगर आपको लू लग जाये और गर्मी की वजह से कोई शारीरिक समस्या हो तो buttermilk का सेवन सदेव आपके लिए उत्तम होता है और साथ ही आँखों के लिए भी यह लाभकारी होती है अगर आंखे जलन कर रही हो तो आप दही की मलाई को पलकों पर लगा सकते है और साथ ही buttermilk का सेवन करते है तो आपको आराम मिलता है |

*.पीलिया जैसे रोग में भी buttermilk का सेवन आपके लिए कमाल का होता है और बहुत लाभदायक होता है |*.चूँकि हम ऊपर जिक्र कर चुके है कि buttermilk में calcium होता है जिसकी वजह से आपका शरीर का ढांचा मजबूत होता हैऔर हड्डियों को बल मिलता है जिसकी वजह से आपके जोड़ों में होने वाले दर्द और कमर दर्द से आपको बहुत राहत मिलती है |
साथ ही तरल होने के कारण यह आपकी अधिक प्यास लगना और गर्मी से होने वाले नुकसान से आपके शरीर को कवर करती है !

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